Shri mad balmiki ramayan
📚श्रीमद् वाल्मिकीय रामायणम्📚 🔥बालकाण्डम् 🔥 चतुर्थः सर्गः (सर्ग - ४) (महर्षि वाल्मीकि का चौबीस हजार श्लोकों से युक्त रामायणकाव्य का निर्माण कर लव-कुश को पढ़ाना, लव और कुश का अयोध्या में श्रीराम द्वारा सम्मानित हो राम दरबार में रामायण गान सुनाना ) प्राप्तराजस्य रामस्य वाल्मीकिर्भगवानृषिः । चकार चरितं कृत्स्नं विचित्रपदमर्थवत् ॥ १ ॥ श्रीरामचन्द्र जी ने जब वन से लौटकर राज्य का शासन अपने हाथ में ले लिया, उसके बाद भगवान् वाल्मीकि मुनिने उनके सम्पूर्ण चरित्र के आधार पर विचित्र पद और अर्थ से युक्त रामायण काव्य का निर्माण किया ॥ १ ॥ चतुर्विंशत्सहस्राणि श्लोकानामुक्तवानृषिः । तथा सर्गशतान् पञ्च षटकाण्डानि तथोत्तरम् ॥ २ ॥ इसमें महर्षि ने चौबीस हजार श्लोक, पाँच सौ सर्ग तथा उत्तरसहित छह काण्डों का प्रतिपादन किया है।॥ २ ॥ कृत्वा तु तन्महाप्राज्ञः सभविष्यं सहोत्तरम् । चिन्तयामास को न्वेतत् प्रयुञ्जीयादिति प्रभुः ॥३॥ भविष्य तथा उत्तरकाण्ड सहित समस्त रामायण पूर्ण कर लेने के पश्चात् सामर्थ्यशाली, महाज्ञानी महर्षि ने सोचा कि कौन ऐसा शक्तिशाली पुरुष होगा, जो इस महाकाव्य को...
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